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चमकीली

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चमकीली By   ADMIN  -   January 3, 2018   20414 नई दिल्ली. 03 जनवरी. भीमा कोरेगांव में शौर्य प्रदर्शन के कार्यक्रम में हंगामे पर रोष व्यक्त करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता तथा अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के अध्यक्ष शांत प्रकाश जाटव ने कहा है, कि ईस्‍ट इंडिया कंपनी के साथ मिलकर 1818 में जहां महार सैनिकों ने भारत में अंग्रेजों को मजबूत किया था, वहीं 1943 में आजाद हिंद फौज के नेतृत्व में लड़ी चमार रेजीमेंट ने अंग्रेजों के दांत खट्टे करते हुए वीरता की नई इबारत लिखी थी. shant prakash jatav जाटव ने कहा कि महार और चमार समुदाय के बीच का यह बुनियादी फर्क आज भी देखने को मिल रहा है. जहां एक ओर देश का चमार समुदाय राष्ट्रहित में देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है, वहीं महार समुदाय आज भी 200 वर्ष पुरानी उस दासता को शौर्य के नाम पर ढोने का कोशिश कर रहा है, जो शौर्य उनका न होकर अंग्रेजों का था. उन्होंने कहा कि भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के बाद एक बार फिर चमार और महार समुदाय का बुनियादी फर्क सामने आ गया है तथा चमार रेजीमेंट के शौर्य की इबारत शौर्य दिवस के मुकाबल...

मादिगा

  मादिगा-   तैलंगी चांभारांची जात. यांची लोकसंख्या सुमारें २० लाख असून मद्रास, हैदराबाद, म्हैसूर संस्थान यांतून विशेष भरणा आहे. यांचा वडिलोपार्जित धंदा चामडयाचें काम करण्याचा आहे पण आज बहुतेक लोक शेती किंवा मजुरी करतात. यांच्यांत 'बसवी' ची चाल सरसकट दिसून येते. कांहीं लोक वैष्णवपंथी आहेत. पश्चिम चालुक्य घराण्याचा राजा मांगेलेसा (इ. स. ५६७-६१०) यानें मांटागा (मातंग?) लोकांस जिंकलें. याच मांटागा लोकांचे 'मादिगा' जातीचे लोक वंशज असावे.     खंड १८ : बडोदे - मूर